Yog: जीवन जीने की पद्धति, बीमारियों में भी काम आता है ध्यान लगाना

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Yog: क्या है योग
योग जीवन की एक पद्धति है, जिसे ऋषि पतंजलि ने क्रमबद्ध ढंग से लिखा था। इसमें यम, नियम, आसन,प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि नाम के आठ अंग है। योग में इन अंगों के अभ्यास से सामाजिक तथा व्यक्तिगत आचरण में सुधार किया जाता है, योग से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और शरीर में खून का अच्छी तरह से संचार होने से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। योग करने से इंद्रियां संयमित भी होती है, इससे मन को शांति व पवित्रता मिलती है। योग का अभ्यास करने से मनोदैहिक विकारों/यव्याधियों की रोकथाम करने, शरीर में प्रतिरोधक क्षमता की बढोतरी तथा तनावपूर्ण परिस्थितियों में सहनशक्ति को बढ़ाने की क्षमता आती है। ध्यान का, जोकि योग के आठ अंगो में से एक है, यदि इसका भी नियमित अभ्यास किया जाए तो इससे शरीर में नकारात्मक प्रतिक्रियाओं को घटाने में मदद मिलती है।
हालांकि योग मुख्यतः एक जीवन पद्धति है, लेकिन इसको लगातार करने से प्रोत्साहक, निवारक और रोगनाशक और अन्य कई तरह के बीमारियों को कम करने में मदद मिलती है। योग के ग्रंथो में स्वास्थ्य के सुधार, रोगों की रोकथाम तथा रोगों के उपचार के लिए कई तरह के आसानों के बारे में बताया गया है। शारीरिक आसनों का चुनाव विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। रोगों की रोकथाम, स्वास्थ्य की उन्नति तथा चिकित्सा के उद्देश्‍यों की दृष्टि से उनका सही चयन कर सही विधि से योग अभ्यास करना चाहिए ।

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