Ayurveda NExT Exam update: आयुर्वेद सहित विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा पैथियों में बैचलर की पढ़ाई कर रहे छात्रों को अब डिग्री की परीक्षा पास करने के बाद डिग्री के लिए नेशनल एक्जिट टेस्ट देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस परीक्षा को पास करने के बाद ही किसी छात्र को मेडिकल पंजीकरण हो सकेगा, इसके बाद ही उन्हें इलाज करने का लाइसेंस मिल सकेगा। हालांकि आयुष छात्र इस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनकी ओर से उठाए गए सवालों के लिए आयुष मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई थी, जिसके बाद केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने यह फैसला किया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह फैसला इस मामले में छात्रों की चिंताओं की समीक्षा करने के लिए गठित समिति की सिफारिश पर लिया गया है। खास बात है कि समिति ने सिफारिश के बाद अब एनसीआईएसएम और एनसीएच अधिनियम, 2020 के तहत 2021-22 शैक्षणिक सत्र में नामांकित छात्रों पर राष्ट्रीय एक्जिट टेस्ट (एनईएक्सटी-नेक्स्ट) लागू हो जाएगा।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के वाइस चांसलर प्रो. संजीव शर्मा की अध्यक्षता में यह समिति बनी थी, जिसने छात्रों से प्राप्त सुझावों की समीक्षा करने के बाद मंत्रालय को सिफारिशें दी थीं, जिसके आधार पर मंत्रालय ने फैसला कर लिया गया है।
आयुर्वेद सहित किसी भी चिकित्सा पैथी में बैचलर की पढ़ाई करने के बाद डिग्री के अंतिम साल में या उसके बाद एक साल की इंटर्नशिप पूरी करने के बाद लाइसेंस और राज्य या राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है। तभी छात्रों को आयुष की डिग्री मिल पाएगी। हालांकि एलोपैथी के छात्रों को फिलहाल यह परीक्षा नहीं देनी होगी। इसी वजह से आयुष के छात्र इस मामले को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे छात्र जिन्होंने अपनी इंटर्नशिप पूरी नहीं की है, लेकिन राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) को क्वालिफाई कर चुके हैं, वे एक साल की इंटर्नशिप पूरी करने के बाद ही राज्य या राष्ट्रीय पंजीकरण बोर्ड में पंजीकरण करा पाएंगे। ऐसे में छात्रों के लि एक साल की इंटर्नशिप के साथ यह परीक्षा पास करना अब अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि इस समिति के गठन का आदेश 12 अगस्त 2024 को जारी हुआ था और इस समिति को गठन के आदेश के एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था. समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी है. इसके बाद नेक्स्ट परीक्षा को विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक सत्र 2021-22 और उसके बाद से लागू करने का फैसला किया गया है.

