From its origins in the Bhore Committee to its present status, the National Institute of Indian Medical Heritage (NIIMH) in Hyderabad preserves India’s rich medical legacy, bridging ancient traditions with modern healthcare research.
हैदराबाद स्थित National Institute of Indian Medical Heritage आज भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत का जीवंत दस्तावेज बन चुका है। औपनिवेशिक काल के अंतिम वर्षों में जन्मी यह परिकल्पना आज एक ऐसे संस्थान के रूप में विकसित हो चुकी है, जो प्राचीन उपचार परंपराओं और आधुनिक शोध के बीच सेतु का काम कर रहा है।
औपनिवेशिक दौर में रखी गई नींव
इस संस्थान की शुरुआत का विचार 1940 के दशक में सामने आया, जब Bhore Committee ने स्वतंत्र भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की रूपरेखा तैयार की। इस समिति में शामिल प्रसिद्ध चिकित्सा इतिहासकार Henry E. Sigerist ने भारत में “इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री ऑफ मेडिसिन” स्थापित करने का सुझाव दिया था।
1946 में इस प्रस्ताव को सरकारी समिति ने मंजूरी दी, जिसने इस अनूठी पहल की नींव रखी।
1956: संस्थान की औपचारिक शुरुआत
यह विचार 1956 में साकार हुआ, जब आंध्र मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम में “डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री ऑफ मेडिसिन” की स्थापना की गई। उसी वर्ष इसे हैदराबाद स्थानांतरित कर दिया गया।
प्रख्यात विद्वान D. V. Subba Reddy के नेतृत्व में यह विभाग तेजी से विकसित हुआ और चिकित्सा इतिहास के शोध, दस्तावेजीकरण और शिक्षण का राष्ट्रीय केंद्र बन गया।
संस्थागत विकास और विस्तार
समय के साथ यह संस्थान देश के प्रमुख शोध निकायों के तहत विकसित होता गया। इसमें Indian Council of Medical Research और बाद में Central Council for Research in Ayurvedic Sciences का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आखिरकार 2009 में भारत सरकार ने इसे वर्तमान स्वरूप में उन्नत किया, जिससे यह एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बन गया।
विरासत और आधुनिकता का संगम
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री Prataprao Jadhav ने इस संस्थान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
“भारत की चिकित्सा विरासत केवल गर्व का विषय नहीं, बल्कि एक जीवंत ज्ञान परंपरा है, जिसने सदियों से स्वास्थ्य व्यवस्था का मार्गदर्शन किया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि SAHI 2.0 जैसी पहलें इस धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर सुलभ बना रही हैं।
चिकित्सा ज्ञान के विकास का आईना
NIIMH की यात्रा स्वयं भारत की चिकित्सा परंपरा के विकास को दर्शाती है—
- वैदिक चिकित्सा पद्धतियां
- शास्त्रीय आयुर्वेद
- औपनिवेशिक दौर की आधुनिक चिकित्सा
- और आज का इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर मॉडल
आज यह संस्थान इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए एक राष्ट्रीय मंच बन चुका है, जहां चिकित्सा प्रणालियों की उत्पत्ति और विकास पर गहन अध्ययन किया जाता है।
भविष्य की दिशा
जैसे-जैसे भारत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, NIIMH की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। यह संस्थान न केवल अतीत को संरक्षित कर रहा है, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य नीति और शोध को भी दिशा दे रहा है।

