आयुष मंत्रालय के NMPB ने विज्ञान भवन में औषधीय पौधों पर चिंतन शिविर आयोजित किया। मंत्री प्रतापराव जाधव ने भारत को वैश्विक हर्बल उत्पाद आपूर्तिकर्ता बनाने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: The National Medicinal Plants Board (NMPB) आने वाले समय में औषधियों के पौधों को उगाने और उनकी प्रोसेसिंग पर फोकस करेगा, ताकि आयुर्वेद और आयुष क्षेत्र को बेहतर गुणवत्ता और पर्याप्त मात्रा में औषधियां मिल पाएं। इसको लेकर आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) ने बुधवार को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में औषधीय पौधों पर एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन आयुष मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि औषधीय पौधे भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की आधारशिला ही नहीं, बल्कि देश की जैविक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों को मिल रही बढ़ती मान्यता भारत को गुणवत्तापूर्ण औषधीय पौधों और वनस्पति आधारित स्वास्थ्य उत्पादों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने का अवसर प्रदान करती है।
मंत्री ने कहा कि चिंतन शिविर का विषय ‘विकसित भारत 2047’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि औषधीय पौधों का क्षेत्र ग्रामीण समुदायों को टिकाऊ आजीविका प्रदान करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यह क्षेत्र किसानों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए सहयोग के नए अवसर खोलता है, जिससे स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव होगा।
उद्घाटन सत्र के दौरान श्री जाधव ने NMPB के 25 गौरवशाली वर्षों को समर्पित स्मारिका, टेरेस गार्डन पुस्तिका का विमोचन किया और सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ द्वारा विकसित ‘एनासाइक्लस पाइरेथ्रम’ की नई किस्म का शुभारंभ किया। इसके साथ ही NMPB और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के बीच अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए गए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने औषधीय पौधों की खेती और उनके सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि NMPB जैसी संस्थाएं विशेष रूप से वर्षा आधारित और सीमांत भूमि वाले क्षेत्रों में किसानों को उच्च मूल्य वाली औषधीय फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूती मिल रही है।
कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि NMPB की रजत जयंती केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन और नवाचार का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और जलवायु अनुकूलता पर विशेष ध्यान देना होगा ताकि भारत की समृद्ध औषधीय वनस्पति का संरक्षण हो सके और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
चिंतन शिविर में विशेषज्ञों ने औषधीय पौधों की खेती, गुणवत्ता नियंत्रण, बाजार विस्तार और अनुसंधान सहयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य औषधीय पौधों के क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।




