Kidney Health : आयुर्वेद के इस नुस्खे से रख सकते हैं अपने गुर्दे को सेहतमंद

Keep your kidney healthy : सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल CDC (सीडीसी) center for disease control की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 15 फीसदी लोग गुर्दे kidney की बीमारी की चपेट में हैं. भारत में मधुमेह Sugar एवं उच्च रक्तचाप high BP से ग्रस्त करीब 40 फीसदी लोग क्रोनिक किडनी डिजीज की बीमारी से जूझ रहे हैं.

Kidney Health : लगातार मधुमेह (शुगर) sugar के मरीजों की बढ़ती हुई तादाद को देखते हुए गुर्दे kidney की बीमारी का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में आयुर्वेद पद्धति से की जाने वाली चिकित्सीय व्यवस्था ज्यादा कारगर साबित होने वाली है. इससे गुर्दे स्वास्थ्य होंगे और मरीजों की जिंदगी भी आसान होगी. चिकित्साविदों की मानें तो आयुर्वेद में वर्णित जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से लंबे समय तक गुर्दों को सेहतमंद बनाए रखा जा सकता है.
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 15 फीसदी लोग गुर्दे की बीमारी की चपेट में हैं. भारत में मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप से ग्रस्त करीब 40 फीसदी लोग क्रोनिक किडनी डिजीज की बीमारी से जूझ रहे हैं.

नीरी-केएफटी का मरीजों पर सकारात्मक प्रभाव
बनारस हिन्दू विष्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद संकाय के डीन प्रोफेसर के. एन. द्विवेदी के मुताबिक, पुनर्नवा, गोक्षुर, वरूण, गुडुची, कासनी, तुलसी, अश्वगंधा और आंवला जैसी औषधियों के सेवन से गुर्दे की क्रियाप्रणाली में सुधार होता है. इससे गुर्दे से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है और यदि कोई विकार भी हो तो उसे ठीक करने में सहायक होती है. इन्हीं जडी-बूटियों से बने आयुर्वेद फार्मूले नीरी-केएफटी का मरीजों पर प्रत्यक्ष रूप से सकारात्मक प्रभाव देखा गया है.

क्रिएटिनिन के स्तर को घटाता
प्रोफेसर के. एन. द्विवेदी ने बताया कि नीरी केएफटी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर किडनी को शक्ति प्रदान करती है. इसमें कुल 20 बूटियां शामिल हैं जिसमें से वरुण मरीजों में क्रिएटिनिन के स्तर को घटाता है. वहीं गोकक्षुरु, जिसे गोखरू भी कहा जाता है, यह नेफ्रॉन की क्षमता को बूस्ट करती है, जिससे गुर्दे की छानने की प्रक्रिया बेहतर होती है. प्रो. द्विवेदी ने बताया कि मरीजों में यह देखा गया है कि नीरी केएफटी के इस्तेमाल से गुर्दा रोगियों में डायलिसिस का खतरा टल जाता है और जो डायलिसिस पर हैं, उनके डायलिसिस चक्र में कमी दर्ज की गई है.

गुर्दों को फेल होने से बचाया जा सकता है
पांच साइंस जर्नल- साइंस डायरेक्ट, गूगल स्काॅलर, एल्सवियर, पबमेड और स्प्रिंजर में प्रकाशित अध्ययनों के मुताबिक नीरी केएफटी का समय रहते इस्तेमाल शुरू हो जाए तो गुर्दों को फेल होने से बचाया जा सकता है. नीरी केएफटी किडनी की सूक्ष्म संरचना और कार्यप्रणाली का उपचार करने में कारगर है और इसके सेवन से गुर्दे के रोगियों में क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरिक एसिड की मात्रा में कमी आई है.

इंफ्लामेंट्री स्ट्रैस को कम करने में कारगर 
अध्ययनों में नीरी केएफटी ऑक्सीडेटिव और इंफ्लामेंट्री स्ट्रैस को भी कम करने में कारगर पाई गई है. शरीर के संक्रमण के खिलाफ लड़ने के लिए यह जरूरी है. ऑक्सीडेटिव स्ट्रैस तब होता है जब शरीर में एंटी आक्सीडेंट और फ्री रेडिकल तत्वों का तालमेल बिगड़ जाता है जिससे शरीर की पैथोजन के खिलाफ लड़ने की क्षमता घटने लगती है. जबकि इंफ्लामेंट्ररी स्ट्रैस बढ़ने से भी शरीर का प्रतिरोधक तंत्र किसी भी बीमारी के खिलाफ नहीं लड़ पाता है.

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