Ayush Minister Prataprao Jadhav clarifies in Parliament that cross therapy is not permitted and only recognized medical systems are allowed. Government stresses patient safety and evidence-based integration of AYUSH systems.Ayush Minister Prataprao Jadhav on Cross Therapy Ban and Recognized Medical Practices in Parliament
नई दिल्ली। संसद में आयुष से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर जवाब देते हुए केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने स्पष्ट किया कि सरकार क्रॉस थैरिपी (Cross Therapy) को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है और केवल मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धतियों (Recognized Systems) के तहत ही इलाज की अनुमति दी जाती है।
मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि आयुष की विभिन्न प्रणालियां—आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—अपनी-अपनी वैज्ञानिक और नियामक संरचना के तहत संचालित होती हैं। इन प्रणालियों के चिकित्सकों को दूसरी पद्धति (जैसे एलोपैथी) में इलाज करने की अनुमति नहीं है, जब तक कि इसके लिए स्पष्ट रूप से प्रशिक्षण और वैधानिक अनुमति न हो।
उन्होंने कहा कि क्रॉस प्रैक्टिस मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए इसे नियंत्रित करना जरूरी है। सरकार और संबंधित नियामक संस्थाएं इस बात पर नजर रख रही हैं कि कोई भी चिकित्सक अपनी निर्धारित प्रणाली से बाहर जाकर इलाज न करे।
आयुष मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार का फोकस आयुष पद्धतियों को एविडेंस-बेस्ड (वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित) बनाने पर है, ताकि उनकी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता बढ़े।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आयुष और आधुनिक चिकित्सा के बीच इंटीग्रेशन (समेकन) को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन यह केवल संरचित, वैज्ञानिक और अनुमोदित तरीके से ही संभव है, न कि अनियंत्रित क्रॉस थैरिपी के जरिए।
मुख्य बातें
- क्रॉस थैरिपी पर सरकार का सख्त रुख
- केवल मान्यता प्राप्त पद्धतियों में ही इलाज की अनुमति
- मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि
- आयुष को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने पर जोर
- नियंत्रित और प्रमाणित तरीके से ही इंटीग्रेशन संभव
निष्कर्ष
संसद में दिया गया यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार आयुष पद्धतियों को बढ़ावा तो दे रही है, लेकिन साथ ही अनियमित और गैर-वैज्ञानिक प्रैक्टिस पर रोक लगाकर स्वास्थ्य प्रणाली को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए रखना चाहती है।





