Desi Ghee क्यों है जरुरी और कितना खाएं, पूरी जानकारी

Desi Cow Ghee Ayurvedic Health Benefits: According to Ayurveda, cow’s desi ghee is not just a cooking ingredient but a powerful rejuvenator and Ojas-enhancing element. Ancient texts like Charaka Samhita and Sushruta Samhita describe ghee (Ghrita) as the श्रेष्ठ स्निग्ध द्रव्य that supports balance of body, mind, and soul.

Desi Cow Ghee Ayurvedic Health Benefits: आयुर्वेद में गाय का देसी घी केवल एक खाने या स्वाद के लिए नहीं है, बल्कि ग्रंथों में इसे रसायन (Rejuvenator) और ओजवर्धक तत्व माना गया है। प्राचीन ग्रंथों जैसे चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में गाय के देसी घी को घृत (घी) लिखा गया है और इसको श्रेष्ठ स्निग्ध द्रव्य बताया गया है, जो शरीर, मन और आत्मा तीनों के संतुलन में सहायक है। आयुर्वेद का मानना है कि शुद्ध देशी गाय का घी शरीर की धातुओं को पोषण देता है, अग्नि को प्रज्वलित करता है और त्रिदोषों—वात, पित्त, कफ—को संतुलित करता है।

  1. घी का आयुर्वेदिक गुणधर्म

आयुर्वेद के अनुसार गाय का घी:

रस (स्वाद): मधुर

वीर्य: शीत

विपाक: मधुर

गुण: स्निग्ध, गुरु, मृदु

इन गुणों के कारण यह विशेष रूप से पित्त और वात को शांत करता है। जिन लोगों में पित्त की अधिकता (जलन, अम्लता, चिड़चिड़ापन) या वात विकार (जोड़ों का दर्द, शुष्कता, अनिद्रा) हो, उनके लिए सीमित मात्रा में घी अत्यंत लाभकारी माना गया है।

  1. अग्नि और पाचन में भूमिका

आयुर्वेद में “अग्नि” को स्वास्थ्य की जड़ कहा गया है। जिसे आम बोलचाल में पेट से जुड़ा हुआ कहा जाता है, यदि पाचन अग्नि मंद हो जाए तो शरीर में आम (टॉक्सिन) बनने लगते हैं। यहीं पर गाय का देसी घी काम करता है। यह घी क्या क्या काम करता है:

जठराग्नि को संतुलित करता है

आंतों को चिकनाहट देता है

कब्ज की समस्या में राहत देता है

पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है

विशेष रूप से गर्म भोजन में थोड़ा सा घी मिलाने से भोजन सुपाच्य हो जाता है।

  1. ओज और रोग प्रतिरोधक क्षमता

आयुर्वेद में “ओज” को जीवन शक्ति कहा गया है। घी ओज बढ़ाने वाला आहार है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

मानसिक स्थिरता देता है

थकान और कमजोरी दूर करता है

बच्चों, बुजुर्गों और प्रसूता महिलाओं के लिए घी विशेष रूप से उपयोगी माना गया है, क्योंकि यह धातुओं को पोषण देता है और शक्ति प्रदान करता है।

  1. मस्तिष्क और स्मरण शक्ति

आयुर्वेद के अनुसार घी “मेद्य” है, यानी बुद्धि और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाला।

दिमाग को पोषण देता है

ध्यान और एकाग्रता बढ़ाता है

अनिद्रा में सहायक

मानसिक तनाव कम करता है

ब्रह्ममुहूर्त में एक चम्मच गुनगुने दूध के साथ घी लेने की परंपरा इसी कारण प्रचलित रही है।

  1. पंचकर्म और औषधीय उपयोग

पंचकर्म चिकित्सा में घी का विशेष स्थान है।

स्नेहन (Oleation Therapy) में घृत का उपयोग

औषधियों को घृत में पकाकर “घृत योग” बनाना

नेत्र रोगों में “घृत तर्पण”

आयुर्वेदिक औषधियों जैसे ब्राह्मी घृत, त्रिफला घृत आदि का आधार भी गाय का घी ही है।

  1. त्वचा और सौंदर्य में उपयोग

घी को आयुर्वेद में प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र माना गया है।

त्वचा की शुष्कता दूर करता है

झुर्रियां कम करने में सहायक

होठों और एड़ियों की दरारों में लाभकारी

घी से अभ्यंग (मालिश) करने से त्वचा को पोषण मिलता है

  1. हृदय स्वास्थ्य पर दृष्टिकोण

आधुनिक समय में घी को लेकर भ्रम है कि यह कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। आयुर्वेद कहता है कि सही मात्रा और शुद्धता महत्वपूर्ण है।

सीमित मात्रा में लिया गया घी पाचन सुधारता है

शरीर में अच्छे फैट के संतुलन में सहायक

अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए

गाय का देसी घी, विशेषकर पारंपरिक बिलौना विधि से बना, अधिक गुणकारी माना जाता है।

  1. धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

भारतीय संस्कृति में घी का धार्मिक महत्व भी है।

यज्ञ और हवन में घी का उपयोग

दीपक जलाने में

सात्विक आहार का प्रमुख अंग

आयुर्वेद के अनुसार सात्विक भोजन मन को शुद्ध और शांत बनाता है, और घी इसमें प्रमुख भूमिका निभाता है।

  1. कितनी मात्रा में लें?

आयुर्वेद कहता है कि मात्रा व्यक्ति की प्रकृति (प्रकृति परीक्षण), आयु और पाचन शक्ति पर निर्भर करती है। सामान्यतः:

वयस्क: 1–2 चम्मच प्रतिदिन

बच्चों के लिए: आवश्यकता अनुसार कम मात्रा

मोटापा या कफ अधिक होने पर सावधानी

  1. किन्हें सावधानी रखनी चाहिए?

जिनका पाचन बहुत कमजोर हो

गंभीर मोटापा

आयुर्वेद के अनुसार गाय का देसी घी केवल स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं, बल्कि पूर्ण पोषण, मानसिक शांति और रोग प्रतिरोधक क्षमता देने वाला अमृत तुल्य आहार है। यह शरीर की धातुओं को पुष्ट करता है, अग्नि को संतुलित रखता है और ओज को बढ़ाता है।

परंतु आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है—“अति सर्वत्र वर्जयेत” अर्थात किसी भी चीज़ की अति हानिकारक है। इसलिए शुद्ध, पारंपरिक विधि से बना गाय का देसी घी, उचित मात्रा में और संतुलित आहार के साथ लेना ही स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।
अगर गाय का देसी घी, औषधि के तौर पर लेना हो तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर लें।

Related Posts

Dubai Ayurveda AYUSH Conference में पारंपरिक चिकित्सा पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा

Dubai Ayurveda AYUSH Conference: Amid rising global demand for traditional medicine, a grand Ayurveda–AYUSH Conference was held in Dubai, bringing together experts, researchers, and practitioners from India, the Gulf, Europe,…

IT में काम करने वाले दोस्तों ने उतारी ऐसेंशियल ऑयल की रेंज

Prakriti Farms Limited launches its ‘Sicana’ essential oil range including lemongrass, eucalyptus, palmarosa, and citronella oils. Founded by IT professionals Rajneesh Verma, Shailendra Singh, Seema Kaul, and Surya Kumar, the…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

Dubai Ayurveda AYUSH Conference में पारंपरिक चिकित्सा पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा

Dubai Ayurveda AYUSH Conference में पारंपरिक चिकित्सा पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा

Desi Ghee क्यों है जरुरी और कितना खाएं, पूरी जानकारी

Desi Ghee क्यों है जरुरी और कितना खाएं, पूरी जानकारी

IT में काम करने वाले दोस्तों ने उतारी ऐसेंशियल ऑयल की रेंज

IT में काम करने वाले दोस्तों ने उतारी ऐसेंशियल ऑयल की रेंज

Mahashivratri पर विशेष: आयुर्वेद में क्यों जरुरी है उपवास

Mahashivratri पर विशेष: आयुर्वेद में क्यों जरुरी है उपवास

मुंबई में मनाया गया यूनानी दिवस 2026

मुंबई में मनाया गया यूनानी दिवस 2026

डायबिटीज कंट्रोल में आयुर्वेद क्या कहता है? प्राकृतिक समाधान जानें

डायबिटीज कंट्रोल में आयुर्वेद क्या कहता है? प्राकृतिक समाधान जानें