Dubai Ayurveda AYUSH Conference में पारंपरिक चिकित्सा पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा

Dubai Ayurveda AYUSH Conference: Amid rising global demand for traditional medicine, a grand Ayurveda–AYUSH Conference was held in Dubai, bringing together experts, researchers, and practitioners from India, the Gulf, Europe, and Asia to discuss integrating Ayurveda, Yoga, Unani, Siddha, and Homeopathy into the global healthcare system.

Dubai Ayurveda AYUSH Conference: वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की बढ़ती मांग के बीच दुबई में आयुर्वेद–आयुष कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित खाड़ी देशों, यूरोप और एशिया के आयुर्वेद के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और आयुष चिकित्सकों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करने पर विचार-विमर्श करना था।

भारत सरकार के Ministry of AYUSH के प्रतिनिधियों ने आयुष सेक्टर में हो रहे नवाचार, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और औषधीय पौधों की वैश्विक मांग पर प्रस्तुति दी। वक्ताओं ने बताया कि आयुर्वेद अब केवल पारंपरिक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि “इंटीग्रेटिव मेडिसिन” का महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है।

AYUSH Budget 2026

केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने अपने संबोधन में कहा कि आयुष अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य समाधान का सशक्त स्तंभ बन चुका है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार आयुष क्षेत्र में गुणवत्ता मानकों, रिसर्च और डिजिटल हेल्थ इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि दुबई जैसे वैश्विक व्यापारिक केंद्र में इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन भारत और यूएई के बीच हेल्थ डिप्लोमेसी को नई दिशा देगा। जाधव ने आयुर्वेदिक दवाओं के अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण, क्लिनिकल रिसर्च और निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्री ने यह भी कहा कि आयुष उत्पादों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत “इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर” मॉडल के जरिए दुनिया को समग्र चिकित्सा का विकल्प प्रदान कर रहा है।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने अपने भाषण में कहा कि वैज्ञानिक प्रमाण (Evidence-based approach) और नवाचार आयुष के वैश्विक विस्तार की कुंजी हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालय रिसर्च संस्थानों, मेडिकल विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर आयुर्वेदिक उपचारों पर प्रमाण आधारित अध्ययन कर रहा है।

कोटेचा ने कहा कि कोविड-19 के बाद दुनिया भर में प्राकृतिक और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले उपचारों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे आयुष सेक्टर को नई गति मिली है।

उन्होंने यूएई में आयुर्वेदिक शिक्षा, वेलनेस सेंटर और हर्बल उत्पादों के विस्तार की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, आयुष केवल रोग उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह “प्रिवेंटिव और प्रमोटिव हेल्थकेयर” का प्रभावी माध्यम है।

सम्मेलन में आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण, रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि कोविड-19 के बाद प्राकृतिक और समग्र चिकित्सा पद्धतियों की ओर लोगों का झुकाव तेजी से बढ़ा है, जिससे आयुष उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कार्यक्रम के दौरान यूएई और भारत के बीच आयुर्वेदिक शिक्षा, रिसर्च सहयोग और औषधीय उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र में इस तरह का आयोजन आयुष उद्योग के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने वाला माना जा रहा है।

कॉन्फ्रेंस में आयुर्वेदिक वेलनेस, पंचकर्म थेरेपी, हर्बल मेडिसिन, न्यूट्रास्यूटिकल्स और योग थेरेपी पर प्रदर्शनी भी लगाई गई, जहां विभिन्न कंपनियों ने अपने उत्पाद और अनुसंधान प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेदिक आयुष कॉन्फ्रेंस 2026 ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। दुबई में इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि आयुष केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक हेल्थकेयर का उभरता हुआ विकल्प है।

आयुष क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, आने वाले वर्षों में खाड़ी देशों में आयुर्वेदिक क्लीनिक, वेलनेस सेंटर और हर्बल उत्पादों की मांग में और तेजी आने की संभावना है। इस सम्मेलन ने भारत और यूएई के बीच हेल्थ डिप्लोमेसी को भी मजबूत करने का कार्य किया है।

kartik Upadhyaya

Kartik has been working in journalism for the past nine years, with a strong focus on the integration of technology in traditional medicine. He writes extensively and effectively about how technological advancements are shaping and transforming the field of Ayurveda. He has been consistently covering technology-driven developments in Ayurveda, and his articles are widely read for their clarity, insight, and relevance.

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