नई दिल्ली। एकीकृत चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और यूनानी चिकित्सा की समृद्ध परंपरा को सम्मान देने के उद्देश्य से इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (IMA-AYUS) द्वारा यूनानी दिवस 2026 का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महान चिकित्सक और शिक्षाविद हकीम अजमल खान की 158वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन 17 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित गालिब इंस्टीट्यूट में किया गया, जहां देशभर से आयुष और यूनानी चिकित्सा पद्धति से जुड़े विशेषज्ञ, चिकित्सक और शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) काशीनाथ समागंडी, निदेशक, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (आयुष मंत्रालय) रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे आधुनिक वैज्ञानिक शोध के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।
यूनानी दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आईएमए आयुष के उपाध्यक्ष डॉ. केशव शर्मा ने हकीम अजमल खां के बहुआयामी व्यक्तित्व और ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि हकीम अजमल खां केवल एक महान यूनानी चिकित्सक ही नहीं थे, बल्कि वे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के प्रतीक भी थे।
डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि हकीम अजमल खां हिंदू महासभा के भी अध्यक्ष रहे थे, जो उनके व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता और सभी वर्गों में सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उस दौर में जब देश सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रहा था, तब हकीम अजमल खां ने चिकित्सा, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना को एक साथ जोड़ने का कार्य किया।
उन्होंने आगे कहा कि हकीम अजमल खां की पहचान किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थी। वे समाज के सभी वर्गों में समान रूप से लोकप्रिय और आदरणीय थे। यूनानी चिकित्सा पद्धति को संस्थागत रूप देने और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. आरिफ जैदी (पूर्व डीन, जामिया हमदर्द) ने की। उन्होंने हकीम अजमल खान के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल यूनानी चिकित्सा को संस्थागत स्वरूप दिया, बल्कि शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में डॉ. रघु राम अय्यागरी (रजिस्ट्रार, दिल्ली भारतीय चिकित्सा परिषद), प्रो. (डॉ.) मोहम्मद इदरीस (पूर्व प्राचार्य, ए एंड यू तिब्बिया कॉलेज), हकीम इमामुद्दीन जकाई (निदेशक, NIUM), प्रो. (डॉ.) नसीम अख्तर खान (HOD, इलाजात, ए एंड यू तिब्बिया कॉलेज) तथा डॉ. सैयद अहमद खान (महासचिव, ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस) ने भी अपने विचार साझा किए।
वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, तब यूनानी चिकित्सा की समग्र और प्राकृतिक उपचार प्रणाली समाज को एक संतुलित स्वास्थ्य मॉडल प्रदान कर सकती है। उन्होंने आयुष पद्धतियों के एकीकरण, अनुसंधान को बढ़ावा देने और युवाओं को यूनानी चिकित्सा शिक्षा की ओर आकर्षित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यूनानी दिवस 2026 का यह आयोजन न केवल हकीम अजमल खान की विरासत को सम्मान देने का अवसर बना, बल्कि आयुष और यूनानी चिकित्सा को नई दिशा देने का मंच भी साबित हुआ।




