Ayurveda Aahara के लिए नियम लाएगा FSSAI

Discover how India’s “Ayurveda Aahara” initiative by FSSAI and Ministry of Ayush is standardizing traditional dietary knowledge with modern food safety for a healthier future.

भारत के पारंपरिक और आयुर्वेदिक आहार के लिए स्टैंडर्ड बनाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण जल्द ही नियम लाने जा रहा है। इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। इसमें आयुर्वेदिक आहार के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया की ट्रेनिंग, आयुर्वेदिक आहार बनाए जाने पर चर्चा, आहार में मिलाए जाने वाले एडिक्टिव की समीक्षा भी जाएगी। इससे पहले इस तरह की बैठक राजस्थान के जयपुर में हुई थी। दरअसल भारत की प्राचीन कल्याण विरासत अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और आयुष मंत्रालय के साझा प्रयासों से “आयुर्वेद आहार” (Ayurveda Aahara) की अवधारणा को एक आधिकारिक और वैज्ञानिक पहचान मिली है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक आहार संबंधी ज्ञान को आधुनिक खाद्य सुरक्षा मानकों के साथ जोड़ना है।

क्या है आयुर्वेद आहार?

आयुर्वेद आहार का अर्थ है वह भोजन जो आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार तैयार किया गया हो। अब इसे केवल घरेलू नुस्खों तक सीमित न रखकर, ‘Ayurveda Aahara’ लोगो के तहत बाजार में उतारा जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं को यह भरोसा मिलता है कि वे जो आयुर्वेदिक उत्पाद खरीद रहे हैं, वे न केवल पारंपरिक रूप से सही हैं, बल्कि सुरक्षा के कड़े मानकों पर भी खरे उतरते हैं।

हितधारक परामर्श बैठक (Stakeholder Consultation Meet)

हाल ही में FSSAI के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय स्तर की हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक का उद्देश्य आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थों के भविष्य को आकार देना और उन्हें मानकीकृत (Standardized) करना है। इसमें उद्योग के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को एक साथ आने का मौका मिलेगा ताकि:

  • आयुर्वेदिक भोजन की प्रामाणिकता बनी रहे।
  • विज्ञान आधारित सुरक्षा मानकों को लागू किया जा सके।
  • एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो जो परंपरा और विज्ञान दोनों का सम्मान करे।

स्वस्थ भारत की ओर एक कदम

“आयुर्वेद आहार” न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय पारंपरिक भोजन की छवि को मजबूती देगा। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

kartik Upadhyaya

Kartik has been working in journalism for the past nine years, with a strong focus on the integration of technology in traditional medicine. He writes extensively and effectively about how technological advancements are shaping and transforming the field of Ayurveda. He has been consistently covering technology-driven developments in Ayurveda, and his articles are widely read for their clarity, insight, and relevance.

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