केंद्रीय बजट 2026-27 में आयुर्वेद और योग सेक्टर को ऐतिहासिक बढ़ावा मिला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इन फैसलों से न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती मिलेगी बल्कि रोजगार, अनुसंधान और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान भी मजबूत होगी।
AYUSH मंत्रालय को मिला बड़ा बजट आवंटन
सरकार ने AYUSH मंत्रालय के लिए लगभग 4,409 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान 3,672 करोड़ रुपये से करीब 20 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि आयुर्वेद, योग, होम्योपैथी और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
AYUSH मंत्री प्रतापराव जाधव के अनुसार, बजट में हुई यह बढ़ोतरी पारंपरिक चिकित्सा उद्योग की तेज प्रगति और बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाती है।
आयुर्वेद शिक्षा और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम
सरकार ने देश में तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) स्थापित करने की घोषणा की है। इससे आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।
इसके साथ ही सात नए आयुर्वेद संस्थान और दस नई एलाइड हेल्थ डिसिप्लिन शुरू की जाएंगी, जिनके माध्यम से करीब एक लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जामनगर स्थित WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को भी और मजबूत किया जाएगा, जिससे भारत पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा।
कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर
सरकार ने वेलनेस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 1.5 लाख केयरगिवर्स को योग और आयुर्वेद सेवाओं में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
साथ ही मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर AYUSH वेलनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां योग, आयुर्वेद और नेचरोपैथी सेवाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी।
औषधीय खेती और किसानों को मिलेगा फायदा
औषधीय जड़ी-बूटियों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए DAJGUA स्कीम के तहत 15 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस योजना से किसानों, स्टार्टअप्स और युवाओं को आय के नए अवसर मिलेंगे और हर्बल उद्योग को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों ने बताया दूरदर्शी बजट
अपोलो आयुर्वेद के सीईओ राजीव वासुदेवन ने इस बजट को एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार यह पहल गैर-संक्रामक रोगों से निपटने और समग्र स्वास्थ्य मॉडल को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी।
इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र में नया डिजाइन संस्थान स्थापित करने की घोषणा क्षेत्रीय विकास और पारंपरिक चिकित्सा उद्योग को मजबूत करेगी।
भारत बनेगा ग्लोबल वेलनेस हब
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे निर्यात-ग्रेड आयुर्वेदिक उत्पादों, मेडिकल रिसर्च और हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर बजट 2026-27 ने आयुर्वेद और योग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का मजबूत स्तंभ बना दिया है और भारत को वैश्विक वेलनेस लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।





