50 प्रतिशत लोग अब आयुर्वेद से कराते हैं इलाज: वैद्य राजेश कटोचा

Vaidya Rajesh Kotecha stated that 90% of people in India are aware of Ayurveda and traditional medicine, while nearly 50% are actively seeking treatment through these systems, reflecting the growing acceptance of AYUSH healthcare.

देश में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति बढ़ते भरोसे को बताते हुए केंद्रीय आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा है कि आज लगभग 90 प्रतिशत लोग आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से परिचित हैं, जबकि करीब 50 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में इनसे उपचार भी करा रहे हैं। उनका यह बयान देश में पारंपरिक चिकित्सा के बढ़ते प्रभाव और स्वीकार्यता को दर्शाता है।

महाराष्ट्र के शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेले के उद्घाटन पर उन्होंने कहा कि माननीय राष्ट्रपति महोदया का पारंपरिक चिकित्सा केा प्रोत्साहन एक बड़ी बात है। उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा में दवाइयों की गुणवत्ता को देखते हुए हमने आयुष क्वालिटी मार्क और आयुष सुरक्षा शुरु किया है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत रुचि दिखाई जा रही है। इससे हमारे प्रयास भी और बेहतर हो रहे हैं। हाल ही में डब्लूएचओ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के शिखर सम्मेलन में 107 से ज्य़ादा देशों ने भागीदारी की थी। जिसमें 25 देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया था। साथ ही में हाल में दुबई में भी इस तरह का एक आयोजन हुआ है। इस वजह से भारत के आयुर्वेद के व्यापार में आठ गुना की बढ़ोतरी हुई है।

कोटेचा ने कहा कि एनएसएसओ के सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, देश की लगभग 50 प्रतिशत जनता अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने में आयुष प्रणालियों का उपयोग करती है। जबकि 90 प्रतिशत से ज्य़ादा लोग इन चिकित्साओं के बारे में जानते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों के प्रति जन-जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

Ministry of AYUSH के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कोटेचा ने कहा कि सरकार आयुष ढांचे को सुदृढ़ करने, शोध को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। आयुष्मान भारत के साथ एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल, आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, तथा मेडिकल शिक्षा में सुधार जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसका समग्र (होलिस्टिक) दृष्टिकोण है, जिसमें शरीर, मन और जीवनशैली को संतुलित करने पर जोर दिया जाता है। आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां—जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और तनाव—के प्रबंधन में लोग प्राकृतिक और कम दुष्प्रभाव वाले विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। आयुर्वेद इस जरूरत को पूरा करता दिखाई दे रहा है।

बाजार के आंकड़े भी इस रुझान की पुष्टि करते हैं। आयुष उत्पादों, हर्बल दवाओं और वेलनेस सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी मध्यम वर्ग में भी आयुर्वेदिक क्लीनिक और पंचकर्म केंद्रों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शोध-आधारित प्रमाण, गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण पर और जोर दिया जाए, तो आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता और बढ़ सकती है। सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से यह क्षेत्र रोजगार सृजन और निर्यात वृद्धि में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

कुल मिलाकर, 90 प्रतिशत जागरूकता और 50 प्रतिशत उपचार का आंकड़ा यह संकेत देता है कि आयुर्वेद अब केवल पारंपरिक विरासत नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है।

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