यूनानी चिकित्सा को मशहूर करने के लिए मुंबई में बैठक

देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मजबूत करने के लिए अगले मुंबई में यूनानी चिकित्सा पर विशेषज्ञ जुटेंगे। इस दौरान केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव मुंबई के सर जेजे हॉस्पिटल परिसर में स्थित रीजनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसिन (RRIUM), मुंबई के नवीनीकृत को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन भी करेंगे। इस कार्यक्रम के साथ यूनानी चिकित्सा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा।
आधुनिक शोध केंद्र
करीब 3.84 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया यह नवीनीकृत केंद्र यूनानी चिकित्सा अनुसंधान और इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर को मजबूत करेगा। वर्ष 1984 में स्थापित यह केंद्र लंबे समय से क्लिनिकल रिसर्च, अकादमिक प्रशिक्षण और मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नई सुविधाओं से साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा तथा आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ समन्वित स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी।
राष्ट्रीय सम्मेलन में जुटेंगे देश-विदेश के विशेषज्ञ
यह सम्मेलन सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन (CCRUM) और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में यूनानी चिकित्सा में नवाचार, शोध प्रमाणन और इंटीग्रेटिव हेल्थ मॉडल पर चर्चा होगी।
सम्मेलन में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री बाबासाहेब पाटिल और प्रकाश आबिटकर सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ और शोधकर्ता भाग लेंगे। इसके अलावा आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसिन के निदेशक प्रो. सैयद शाह आलम भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
यूनानी चिकित्सा के प्रचार के लिए नई पहल
सम्मेलन के दौरान CCRUM का नया वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किया जाएगा। साथ ही यूनानी चिकित्सा पर आधारित नई प्रकाशन सामग्री, अनुसंधान सहयोग समझौते (MoUs) और उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को सम्मानित किया जाएगा।
हकीम अजमल खान की जयंती पर मनाया जाता है यूनानी दिवस
यूनानी दिवस हर वर्ष 11 फरवरी को महान चिकित्सक, शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी हकीम अजमल खान की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। यह दिवस यूनानी चिकित्सा की समृद्ध परंपरा को संरक्षित और वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने के भारत सरकार के संकल्प को दर्शाता है।
सरकार का लक्ष्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत करना है।

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