Ayurvedic herbs for liver health: प्राकृतिक तौर पर लीवर की देखभाल

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आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते प्रदूषण के बीच लीवर से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में Ayurveda एक बार फिर प्रभावी और प्राकृतिक समाधान के रूप में उभर रहा है। आयुर्वेद में कई ऐसे औषधीय पौधों का उल्लेख है जो लीवर को डिटॉक्स करने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।

वैद्य एम डी त्रिपाठी के बताते हैं कि लीवर को ठीक रखने के लिए आयुर्वेद में बहुत सारी जड़ी बुटियां और इलाज है, लेकिन सबसे बड़ा इलाज खुद पर कंट्रोल है, जोकि आपके खानपान और आपकी जीवनशैली से जुड़ा हुआ है। आप समय पर उठें, नियमित व्यायाम करें, समय पर खाएं और अपनी दिनचर्या को संयमित रखें। ऐसा करेंगे तो बड़ी बीमारियां दूर रहेंगी। फिर आपको दवाओं की जरुरत ही कम पड़ेगी। हमारे आयुर्वेद में प्रकृति ही इलाज है। हमारी दवाएं भी सब प्राकृतिक ही होती हैं। आपको कुछ औषधिय पौधों के बारे में बताते हैं जोकि लीवर से जुड़ी परेशानियों में आयुर्वेद के इलाज के तहत दिए जाते हैं।

  1. भू‍म्यामलकी (Phyllanthus niruri)
    इसे लीवर टॉनिक के रूप में जाना जाता है। यह हेपेटाइटिस और फैटी लीवर जैसी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है।
  2. कुटकी (Picrorhiza kurroa)
    कुटकी लीवर को साफ करने और पित्त संतुलित करने में मदद करती है। आयुर्वेद में इसे शक्तिशाली हेपेटो-प्रोटेक्टिव औषधि माना गया है।
  3. गिलोय (Tinospora cordifolia)
    गिलोय इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ-साथ लीवर फंक्शन को सुधारने में भी सहायक है।
  4. कालमेघ (Andrographis paniculata)
    इसे “किंग ऑफ बिटर” कहा जाता है। यह लीवर डिटॉक्स और संक्रमण से बचाव में उपयोगी है।

क्यों ज़रूरी है लीवर की देखभाल?

लीवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, पाचन में मदद करने और ऊर्जा को स्टोर करने का काम करता है। खराब लाइफस्टाइल, शराब का सेवन और जंक फूड लीवर पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

वैद्य एम डी त्रिपाठी के अनुसार, इन जड़ी-बूटियों का सेवन सही मात्रा और चिकित्सकीय सलाह के साथ करना चाहिए। प्राकृतिक होने के बावजूद इनका अधिक उपयोग नुकसानदायक हो सकता है।

Ayurved Indian Bureau

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