If you are feeling less thirsty, it could be a warning sign of dehydration or internal imbalance. Discover Ayurvedic remedies, lifestyle tips, and natural hydration methods to maintain optimal health
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर छोटी-छोटी शारीरिक संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्हीं में से एक है प्यास कम लगना। सामान्य रूप से प्यास शरीर का प्राकृतिक संकेत है, जो बताता है कि शरीर को जल की आवश्यकता है। लेकिन यदि आपको लंबे समय तक प्यास कम लग रही है, तो यह शरीर में असंतुलन या किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
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क्यों कम लगती है प्यास?
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में तीन दोष—वात, पित्त और कफ—का संतुलन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। जब कफ या वात दोष बढ़ जाता है, तो शरीर की प्राकृतिक संवेदनाएं मंद हो सकती हैं। इससे प्यास का अनुभव भी कम हो जाता है।
इसके अलावा, निम्न कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं:
डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण)
अत्यधिक एयर कंडीशन वातावरण
कम शारीरिक गतिविधि
बढ़ती उम्र
मधुमेह या किडनी से जुड़ी समस्याएं
यदि प्यास कम लगने के साथ थकान, चक्कर, सिरदर्द या मुंह सूखना जैसे लक्षण हों, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है।
कम प्यास के क्या हैं खतरे?
शरीर में पानी की कमी होने से रक्त गाढ़ा हो सकता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक जल की कमी से:
किडनी पर असर
त्वचा का रूखापन
पाचन संबंधी दिक्कतें
कब्ज
यूरिन संक्रमण
जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
आयुर्वेद कहता है कि जल शरीर में “रस धातु” को संतुलित रखता है। रस धातु कमजोर होने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घटती है।
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद में जल सेवन को ‘उष्ण जल’ (गुनगुना पानी) के रूप में लेने की सलाह दी जाती है। यह पाचन अग्नि को मजबूत करता है और शरीर के विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।
आयुर्वेदिक उपाय:
सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पिएं।
पानी में थोड़ा सा सौंफ या धनिया उबालकर सेवन करें।
नारियल पानी और छाछ को आहार में शामिल करें।
मौसमी फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा लें।
दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी जरूर पिएं, भले ही प्यास न लगे।
जीवनशैली में बदलाव जरूरी
आयुर्वेद केवल उपचार नहीं, बल्कि जीवनशैली सुधार पर जोर देता है। नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम शरीर की संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं, जिससे प्यास और भूख जैसे प्राकृतिक संकेत सामान्य बने रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर के संकेतों को समझना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है। यदि प्यास कम लग रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते जल सेवन बढ़ाएं और आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाएं। प्यास कम लगना एक सामान्य समस्या लग सकती है, लेकिन यह शरीर में गहरे असंतुलन का संकेत भी हो सकता है। आयुर्वेद संतुलित आहार, पर्याप्त जल सेवन और नियमित दिनचर्या के जरिए इस समस्या से बचने का प्राकृतिक समाधान देता है। स्वस्थ जीवन के लिए शरीर की आवाज सुनें और आयुर्वेद को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।




