Ayurveda TB study: TB के इलाज में अब आयुर्वेद भी होगा शामिल

India initiates a first-of-its-kind global clinical study to evaluate Ayurveda as an adjunct to modern tuberculosis treatment, involving 1,250 patients across eight institutions to assess recovery, safety, nutrition, and quality of life.

Ayurveda TB study: भारत को तपेदिक (TB) से मुक्ति के लिए अब सरकार ने आयुर्वेद को भी इस बीमारी के इलाज में शामिल कर लिया है, हालांकि अभी यह सिर्फ पाइलेट बेसिस पर है, लेकिन इसके परिणामों के बाद इसको बड़े स्तर पर टीबी के इलाज में शामिल किया जा सकता है। इससे पहले योग को भी मानसिक बीमारियों में एक सहायक के तौर पर मार्डन इलाज में शामिल किया गया था।

टीबी के इलाज को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक अनोखा और वैश्विक स्तर का क्लिनिकल अध्ययन शुरू किया है। इस अध्ययन में पहली बार आयुर्वेद को आधुनिक टीबी उपचार के साथ सहायक (एडजंक्ट) के रूप में परखा जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत देशभर के आठ प्रमुख टीबी संस्थानों में 1,250 नए टीबी मरीजों को शामिल किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि आयुर्वेदिक उपचार आधुनिक चिकित्सा के साथ मिलकर मरीजों की रिकवरी को किस हद तक बेहतर बना सकता है। विशेषज्ञ इस अध्ययन के माध्यम से पोषण स्तर, बीमारी की प्रगति, जीवन की गुणवत्ता, उपचार की सुरक्षा और रिकवरी की गति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का गहराई से मूल्यांकन करेंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि यह अध्ययन सफल रहता है, तो यह टीबी के इलाज में एक नया मॉडल पेश कर सकता है, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक विज्ञान का प्रभावी समन्वय देखने को मिलेगा।
भारत पहले से ही आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। इस नई पहल को ‘इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर’ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो मरीजों को अधिक समग्र और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने में मदद करेगा। सरकार और शोध संस्थानों को उम्मीद है कि इस अध्ययन के सकारात्मक परिणाम भविष्य में टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों को और मजबूत बनाएंगे तथा वैश्विक स्तर पर भी भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की उपयोगिता को स्थापित करेंगे।
केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने कहा कि आयुर्वेद को आधुनिक टीबी उपचार के साथ जोड़ने का यह प्रयास भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की वैज्ञानिक मान्यता को मजबूत करेगा। उन्होंने जोर दिया कि यह अध्ययन “एविडेंस-बेस्ड” (साक्ष्य आधारित) दृष्टिकोण पर आधारित है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आयुर्वेद मरीजों की रिकवरी, पोषण और जीवन गुणवत्ता में किस प्रकार सुधार कर सकता है।
वहीं, केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Prataprao Jadhav ने इसे समग्र स्वास्थ्य मॉडल की दिशा में अहम पहल बताया। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के एकीकरण के लिए लगातार काम कर रहा है। जाधव ने यह भी कहा कि इस तरह के क्लिनिकल अध्ययन से आयुर्वेद की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक आधार मिलेगा और भविष्य में इसे व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किया जा सकेगा।

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