WHO के साथ पारंपरिक चिकित्सा के लिए अलग माड्यूल विकसित करेगा भारत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आयुष मंत्रालय की बैठक में पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों में औपचारिक रूप से शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। दो दिवसीय तकनीकी बैठक 20–21 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित होटल इम्पीरियल में आयोजित हुई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय क्लासिफिकेशन सिस्टम ICHI में पारंपरिक चिकित्सा के लिए अलग मॉड्यूल विकसित करने पर सहमति बनी।

बैठक का उद्देश्य

बैठक का मुख्य एजेंडा अंतरराष्ट्रीय क्लासिफिकेशन ऑफ हेल्थ इंटरवेंशंस (ICHI) के तहत ट्रेडिशनल मेडिसिन इंटरवेंशन कोड सेट विकसित करना था, ताकि आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी उपचार पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य डेटा और बीमा प्रणाली में मानकीकृत रूप से शामिल किया जा सके। दरअसल 24 मई 2025 को WHO और भारत के आयुष मंत्रालय के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते और डोनर एग्रीमेंट हुआ था, उसकी अगली कड़ी के तौर पर इस बैठक को यह फैसला हुआ है, जिसके तहत भारत ICHI के ट्रेडिशनल मेडिसिन मॉड्यूल के लिए लगभग 3 मिलियन डॉलर का वित्तीय और तकनीकी सहयोग दे रहा है। बैठक में WHO मुख्यालय जिनेवा, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, जामनगर तथा WHO के सभी छह रीजन (अफ्रीका, अमेरीका, यूरोप, ईस्टर्न मेडिटेरेनियन, दक्षिण-पूर्व एशिया और वेस्टर्न पैसिफिक) के प्रतिनिधियों के साथ भारत, भूटान, ब्राजील, ईरान, मलेशिया, नेपाल, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई सदस्य देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

भारत की भूमिका और सरकार का दृष्टिकोण

आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि प्रस्तावित ICHI मॉड्यूल से आयुष प्रणालियों की वैश्विक मान्यता मजबूत होगी और WHO के स्टैंडर्ड, सुरक्षित और साक्ष्य-आधारित हेल्थकेयर के प्रयासों को गति मिलेगी। यह पूरी प्रक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि से जुड़ी है, जिसमें वे मन की बात और अन्य मंचों से आयुष सिस्टम को वैज्ञानिक सत्यापन, मानकीकरण और वैश्विक पहुंच दिलाने की आवश्यकता पर लगातार जोर देते रहे हैं।

आगे की दिशा

WHO और आयुष मंत्रालय ने सहमति जताई कि ICHI के ट्रेडिशनल मेडिसिन मॉड्यूल के विकास के साथ अस्पताल प्रबंधन, क्लिनिकल डॉक्यूमेंटेशन, हेल्थ रिसर्च और बीमा कवरेज में आयुष उपचारों को व्यवस्थित रूप से दर्ज और मान्यता दी जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कोड सेट फाइनल होने के बाद आयुष सेवाओं के लिए पारदर्शी बिलिंग, अंतरराष्ट्रीय तुलना योग्य डेटा तथा वैश्विक नीति निर्माण में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की हिस्सेदारी बढ़ेगी, जिससे भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को संस्थागत वैश्विक मंच मिलेगा।

Related Posts

Jal Neti से करें मानसिक और श्वसन तंत्र को बीमारी मुक्त

Jal Neti is a powerful yogic nasal cleansing technique that helps improve breathing, reduce sinus issues, and enhance mental clarity. Learn its benefits, steps, and precautions. योग केवल आसनों तक…

कैंसर के इलाज में आयुर्वेद के उपयोग पर अमेरिका के साथ रिसर्च

A high-level delegation from the Ministry of Ayush, led by Vaidya Rajesh Kotecha, visited the National Cancer Institute to strengthen collaboration in integrative oncology, natural products research, and global health…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

Jal Neti से करें मानसिक और श्वसन तंत्र को बीमारी मुक्त

Jal Neti से करें मानसिक और श्वसन तंत्र को बीमारी मुक्त

कैंसर के इलाज में आयुर्वेद के उपयोग पर अमेरिका के साथ रिसर्च

कैंसर के इलाज में आयुर्वेद के उपयोग पर अमेरिका के साथ रिसर्च

Ayurveda में Innovation बढ़ाने के लिए समझौता

Ayurveda में Innovation बढ़ाने के लिए समझौता

आयुष मंत्रालय का खोखला दावा, टोल फ्री हेल्पलाइन है बंद

  • By एसk
  • April 27, 2026
  • 148 views
आयुष मंत्रालय का खोखला दावा, टोल फ्री हेल्पलाइन है बंद

Ayurvedic Treatment for Malaria: मलेरिया में आयुर्वेदिक इलाज

Ayurvedic Treatment for Malaria: मलेरिया में आयुर्वेदिक इलाज

Kedarnath Yatra 2026: दर्शनों के लिए खुले बाबा के द्वार

  • By एसk
  • April 22, 2026
  • 44 views
Kedarnath Yatra 2026: दर्शनों के लिए खुले बाबा के द्वार