NMR test for honey: देश में शुद्ध शहद को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। जहां शुद्ध शहद के लिए एनएमआर टेस्ट की वकालत की जा रही है, तो दूसरी ओर कुछ कंपनियां शहद की टेस्टिंग में कुछ बदलाव नहीं करने पर अड़ी हुई हैं। अगर देश में एनएमआर टेस्ट अनिवार्य नहीं हुआ तो देश में शहद की क्वालिटी से समझौता जारी रहे।
दरअसल पिछले साल दिसंबर 2020 में सेंट्रल फॉर साइंस एंड इंवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट के बाद ये साफ हो गया था कि देश में बिक रहे ज्य़ादातर शहद के ब्रांड्स में राइस सिरप की मिलावट है। जोकि सिर्फ एक विशेष टेस्ट (एनएमआर) के जरिए से ही पकड़ में आ सकती है। फिलहाल देश में सी3 और सी4 टेस्ट ही अनिवार्य है, जोकि इस मिलावट को नहीं पकड़ पा रहा है। एनएमआर टेस्ट के लिए टेस्टिंग फेसिलिटी को लेकर अक्सर कुछ कंपनियां सवाल खड़ी करती हैं। हालांकि जब देश एक साल में कोरोना की वैक्सीन बना सकता है तो क्या देश में एनएमआर टेस्टिंग फेसिलिटी के लिए 4 सेंटर नहीं बनाए जा सकते।
जानकार मानते हैं जब शहद एक्सपोर्ट के लिए एनएमआर टेस्टिंग हो सकता है तो घरेलू शहद के लिए एनएमआर टेस्ट क्यों अनिवार्य नहीं हो सकता है। मिलावटी शहद की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है।
Ayurveda Aahara के लिए नियम लाएगा FSSAI
Discover how India’s “Ayurveda Aahara” initiative by FSSAI and Ministry of Ayush is standardizing traditional dietary knowledge with modern food safety for a healthier future. भारत के पारंपरिक और आयुर्वेदिक…






