पारंपरिक और मार्डन मेडिसिन के इंटीग्रेशन पर काम कर रही है सरकार

नई दिल्ली। मार्डन मेडिसिन और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार “इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर” की दिशा में काम कर रही है, इसके तहत एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों अपनी-अपनी पहचान के साथ, रेफरल और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जोड़े जा रहे हैं, ताकि दोनों अपने अपने तरीकों से बीमारियों का इलाज करें, लेकिन एक दूसरे के पूरक बनकर काम करें। सकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के तहत ज्यादातर जिलों के PHC/CHC और ज़िला अस्पतालों में एलोपैथिक अस्पतालों में AYUSH OPD और पैंट्री, दवाखाना आदि एक साथ बैठाया है, ताकि एक ही सेंटर पर दोनों तरह के इलाज उपलब्ध हों। कोरोना में पारंपरिक चिकित्सा के बेहतरीन रोल के बाद अब डब्लूएचओ भी मार्डन और पारंपरिक चिकित्सा को एक साथ काम करने पर ज़ोर दे रहा है।
इस बारे में डब्लूएचओ की साउथ ईस्ट एशिया की क्षेत्रीय डायरेक्टर डॉ. पूनम क्षेत्रपाल ने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा और मार्डन मेडिसन को इंटीग्रेट करने के लिए हम डब्लूएचओ के सदस्य देशों में इस इंटीग्रेशन के लिए कह रहे हैं। प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स में तो इस इंटीग्रेशन के लिए हम लगातार कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा अनुभव है कि आम लोग काफी बड़ी संख्या में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर मुड रहे हैं। आम लोग मानते हैं कि पारंपरिक चिकित्सा के साइड इफैक्ट कम हैं और क्रानिक बीमारियों में यह पद्धतियां बेहतर रिजल्ट देती हैं।
इधर केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में “मेडिकल प्लूरलिज़्म” को आधिकारिक नीति बना दिया है, यानी अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियाँ मिलकर काम करें, क्रॉस-रेफरल हो, पर अपनी स्वतंत्र ट्रेनिंग और रेगुलेशन बनी रहे। स्कीमें, प्रोग्राम और डिजिटल इंटीग्रेशन आयुष्मान भारत के तहत Ayush Health & Wellness Centres / आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जा रहे हैं, जिनमें एलोपैथिक CHO/MBBS और आयुष डॉक्टर मिलकर NCD, मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर, जेरियाट्रिक, स्कूल हेल्थ जैसे प्रोग्राम चलाते हैं।Ayushman Bharat Digital Mission और ABHA ID के जरिए एलोपैथी और AYUSH दोनों के अस्पतालों व डॉक्टरों के रिकॉर्ड एक ही डिजिटल इकोसिस्टम में लाए जा रहे हैं, ताकि मरीज की हेल्थ हिस्ट्री, प्रिस्क्रिप्शन और रिपोर्ट दोनों सिस्टम के डॉक्टर देख सकें। Ministry of Ayush और Health Ministry ने मिलकर DGHS के भीतर एक Ayush Vertical बनाया है, जो पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम, एजुकेशन और ट्रेनिंग में दोनों सिस्टम के समन्वय पर काम करता है।

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