Ujjayi Pranayama: (जिसे “विजयी श्वास” भी कहते हैं) एक शक्तिशाली योगिक श्वास तकनीक है, जिसमें गले को हल्का संकुचित कर सांस लेने-छोड़ने पर समुद्र जैसी ध्वनि होती है। यह आसन के दौरान या स्वतंत्र प्राणायाम के रूप में किया जाता है। यह तनाव कम करता है, फेफड़ों को मजबूत बनाता है और ऊर्जा बढ़ाता है।
Ujjayi Pranayama करने की विधि
सुखासन या पद्मासन में बैठें, रीढ़ सीधी रखें। कंठ को हल्का संकुचित करें जैसे आईना धुंधला करने के लिए सांस से कोहरा बनाते हैं। नाक से धीरे लंबी सांस लें-छोड़ें, गले से “हा” जैसी ध्वनि निकले। शुरुआत में 5-10 सांसें करें, धीरे बढ़ाएं। सुबह खाली पेट अभ्यास करें।
प्रमुख लाभ
यह मन को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है, थायरॉइड, हृदय और पाचन सुधारता है। इम्यूनिटी मजबूत होती है, थकान दूर भगाता है तथा नींद बेहतर करता है। सर्दी-जुकाम जैसी सांस की समस्याओं में राहत देता है।





