आयुर्वेद में सूर्य को जीवन ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना जाता है, जो शरीर के दोषों को संतुलित करता है और प्राणशक्ति प्रदान करता है।
सूर्य का आयुर्वेदिक महत्व
आयुर्वेद सूर्य को ‘चिकित्सक देवता’ कहता है, क्योंकि इसकी किरणें जठराग्नि (पाचन शक्ति), रोग प्रतिरोधक क्षमता और ओज (जीवन बल) बढ़ाती हैं। “सूर्याद् भवति जीवन्म्, सूर्येण जीवनं धार्यते” — यह श्लोक दर्शाता है कि सूर्य ही जीवन धारण करता है। सूर्य अग्नि तत्व का स्वामी है, जो पंचमहाभूत सिद्धांत के अनुसार वात और कफ दोषों को नियंत्रित करता है।
स्वास्थ्य लाभ
सूर्य की किरणें विटामिन डी का उत्पादन करती हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाती हैं और इम्यून सिस्टम को सक्रिय रखती हैं। सुबह की धूप (अतप सेवन) आलस्य दूर करती है, भूख लगाती है और त्वचा को शुद्ध करती है। यह मानसिक स्फूर्ति भी प्रदान करती है।
दिनचर्या में उपयोग
सूर्य नमस्कार और प्रातःकालीन अर्घ्य जैसी प्रथाएं आयुर्वेद में अनिवार्य हैं। औषधियों को सूर्यपाक विधि से सुखाने से उनकी शक्ति बढ़ती है, जैसे त्रिफला चूर्ण। सुबह 7-9 बजे तक हल्की धूप सबसे लाभकारी है।





