Ayush 64: कोरोना का नया वैरिएंट एक बार फिर दुनिया को डराने लगा है। हालांकि दूसरी लहर के दौरान आयुर्वेद की एक दवा आयुष 64 ने कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मरीज़ों पर बहुत ही अच्छे रिजल्ट दिए हैं। अब आयुष मंत्रालय इस डेटा के आधार पर कोरोना में इस दवा को कोरोना के रामबाण बता रहा है।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लाखों पेशेंट होम आइसोलेशन में थे। हमने सेवा भारती और दूसरे कई संगठनों की मदद से लोगों के घरों में इस दवा को पहुंचाने की कोशिश की। हमने उस दौरान करीब 1.50 लाख लोगों के घरों में इस दवा को पहुंचाया था। दवा के डेटा के लिए हमने इस दवा के साथ एक गुगल फार्म भी दिया था। ताकि हमें दवा की एफिकेसी के बारे में पता चल पाए। हमको करीब 66 हज़ार कोरोना मरीज़ों का डेटा मिला। इसमें से करीब 42 परसेंट लोग जिन्होंने आयुर्वेद की आयुष 64 दवा ली थी वो पहले हफ्ते में ही ठीक हो गए। जबकि दूसरे हफ्ते में 84 परसेंट लोगों ने कोरोना को मात दी। बड़ी बात ये है कि इनमें से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई।
दरअसल कोरोना के उपचार के लिए पॉलीहर्बल आयुर्वेदिक औषधि ‘आयुष- 64’ का उपयोग इस साल अप्रेल में शुरु किया गया था। ‘आयुष- 64’ को मूल रूप से मलेरिया में इस्तेमाल की जाने वाली एक दवा है, जिसको 1980 में विकसित किया गया था। लेकिन ये दवा अब कोरोना में भी काफी कारगर साबित हो रही है। इस दवा को कोरोना के लिए इस्तेमाल करने से पहले इसके काफी व्यापक परीक्षण किया गया था और ये दवा कोरोना में काफी कारगर पाई गई थी। बाद में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी इसका इस्तेमाल किया गया था।
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